1 अक्टूबर से लागू PM उत्सर्जन मानकों की दी जानकारी, OCEMS डेटा की न्यूनतम 85 प्रतिशत उपलब्धता अनिवार्य
खैरथल-तिजारा, 13 अक्टूबर। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय भिवाड़ी की ओर से मंगलवार को MSME टेक्नोलॉजी सेंटर, पथरेड़ी में औद्योगिक इकाइयों में वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अर्धदिवसीय जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एवं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा जारी निर्देशों की जानकारी देते हुए औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित मानकों का निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूक किया गया।
कार्यशाला में CAQM के निर्देश संख्या 98 के तहत 1 अक्टूबर 2026 से लागू संशोधित पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन मानकों की जानकारी दी गई। बताया गया कि निर्देशों के दायरे में आने वाली संबंधित औद्योगिक इकाइयों के लिए PM उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर (mg/Nm³) निर्धारित की गई है। इसके अनुपालन के लिए उद्योगों को बैग फिल्टर सहित वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (APCDs) को सदैव कार्यशील रखने तथा उनका नियमित रखरखाव और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कार्यशाला में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) की स्थापना, CPCB के नए सर्वर से कनेक्टिविटी तथा निगरानी संबंधी आंकड़ों के नियमित प्रेषण पर भी जोर दिया गया। संबंधित औद्योगिक इकाइयों के लिए CPCB सर्वर पर कम से कम 85 प्रतिशत डेटा उपलब्धता बनाए रखना आवश्यक बताया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल OCEMS स्थापित करना या सर्वर से कनेक्टिविटी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डेटा का नियमित एवं निर्बाध प्रेषण भी सुनिश्चित करना होगा।
येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट प्रणाली की दी जानकारी
CPCB द्वारा 30 सितंबर 2026 को जारी येलो, ऑरेंज एवं रेड अलर्ट प्रणाली के संबंध में भी उद्योग प्रतिनिधियों को विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि OCEMS डेटा की उपलब्धता एवं उत्सर्जन स्तर के आधार पर CPCB सर्वर से अलर्ट जारी किए जाते हैं, जो संबंधित उद्योगों के OCEMS पोर्टल पर प्रदर्शित होते हैं। येलो एवं ऑरेंज अलर्ट मिलने पर संबंधित उद्योगों को आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई कर उसकी अनुपालना रिपोर्ट एवं कार्रवाई के साक्ष्य सीधे CPCB सर्वर पर अपलोड करने होंगे।
रेड अलर्ट की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार संबंधित औद्योगिक इकाई का निरीक्षण एवं आवश्यक जांच की जाएगी। जांच के दौरान वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के संचालन में अनियमितता, प्रभावी संचालन में कमी अथवा उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू निर्देशों के अनुसार बिना पूर्व नोटिस उद्योग बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों से इस व्यवस्था की गंभीरता को समझते हुए सभी निर्धारित मानकों एवं निगरानी संबंधी आवश्यकताओं का निरंतर पालन करने का आह्वान किया।
*तकनीकी समस्याओं के समाधान पर भी हुआ मंथन*
कार्यशाला के दौरान OCEMS डेटा प्रेषण में आने वाली तकनीकी समस्याओं, सर्वर कनेक्टिविटी,डेटा उपलब्धता तथा निगरानी प्रणाली के उचित संचालन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही CPCB एवं CAQM द्वारा वायु प्रदूषण की रोकथाम, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जारी अन्य संबंधित निर्देशों की जानकारी भी दी गई। कार्यशाला का उद्देश्य उद्योगों को लागू निर्देशों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के साथ अनुपालन में आने वाली तकनीकी कठिनाइयों के समाधान में सहयोग प्रदान करना रहा।
कार्यशाला में भिवाड़ी क्षेत्र की 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान भिवाड़ी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, भिवाड़ी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एवं लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों सहित चौधरी जसबीर,जी.एल. स्वामी,सरजीत यादव,राम प्रकाश,अजित यादव एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी अमित जुयाल,अंकुर पाठक,रोहित मीणा,सुमित दहिया एवं अश्विनी बेनीवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मण्डल की ओर से सभी संबंधित औद्योगिक इकाइयों से अपील की गई कि वे OCEMS की कार्यशीलता एवं डेटा प्रेषण की नियमित जांच करें, CPCB सर्वर पर न्यूनतम निर्धारित डेटा उपलब्धता बनाए रखें तथा APCDs का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करें। साथ ही लागू उत्सर्जन मानकों एवं ऑनलाइन निगरानी संबंधी निर्देशों का निरंतर पालन करें। निर्धारित मानकों एवं निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मण्डल ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक उत्सर्जन पर निरंतर निगरानी रखना,निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना तथा भिवाड़ी क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।

